एक पुत्र के रूप में जब राजा दशरथ ने श्री राम को माता कैकेयी के कहने पर 14 वर्ष का वनवास दिया तो श्री राम ने एक बार भी नहीं सोचा और आदेश का पालन किया। एक भाई के रूप में श्री राम अपने सभी भाईयों लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न से अत्यंत स्नेह करते थे। जब उनको वनवास और भरत को शासन देने की बात हुई तो भी श्री राम को हर्ष ही हुआ कि भरत राजा बनकर शासन करेंगे। लक्ष्मण तो जैसे श्री राम की परछाईं ही थे। दोनों ने कभी भी एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। आज भी अनेकों घरो में भाइयों का नाम राम-लक्ष्मण रखा जाता है।
एक पति के रूप में श्री राम ने अपने सभी धर्म निभाए। वो उनका स्नेह और धर्म का पालन ही था माता सीता के प्रति जो उनको हज़ारों किलोमीटर दूर लंका तक लेकर गया उनकी खोज में, माता सीता और श्री राम भारतीय दंपतियों के लिए आदर्श है। श्री राम का नैतिक आचरण, सत्य, त्याग, धैर्य, करुणा, पराक्रम हर भारतीय को प्रेरित करती है।
लंका पर विजय पाने के बाद भी उन्होंने उसपर कब्ज़ा नहीं किया, बल्कि रावण के भाई विभीषण को ही वहां का राजा बनाया। किसी का दमन करना, अतिक्रमण करना, यह हमेशा से भारत की परंपरा के विरुद्ध रहा है। इसीलिए राम मंदिर का निर्माण विश्व भर के लिए एक जीवंत सन्देश है। प्रभु श्री राम की तरह धर्म आधारित जीवन जीने की प्रेरणा देने वाला एक मंदिर।
-अरुणेश कुमार

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