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सोमवार, 11 जनवरी 2021

जननी है वो

 एक औरत है वो

सहनशील है वो 

क्षमाशील है वो

जननी   है   वो

भगिनी  है  वो

हर पल एक नई

भूमिका अपनाती है वो

पूज्यनीय  नारी   है वो



जीवन के हर मोड़ पर साथ देती

आदर्श  पत्नी है वो

शक्ति है वो

प्रेरणा है वो

सृष्टि के रचनाकार है वो

क्योंकि खुद में ही सम्पूर्ण

नारी है वो।

रविवार, 10 जनवरी 2021

नारी हूँ मैं

 अबला नहीं

नारी हूँ मैं,

दुर्गा का स्वरूप हूँ मैं

ममता की छांव हूँ मैं

मां-बाप की शान हूँ मैं

बेटी हूँ मैं

पापा की प्यारी हूँ मैं

माता की दुलारी हूँ मैं

अबला नहीं

नारी हूँ मैं।


फिर क्यों जन्म से पहले

मार दी जाती हूं मैं?

मां, बहन, बेटी और पत्नी भी हूँ मैं

फिर क्यों संसार में

बलात्कारियों के सर चढ़ी जाती हूँ मैं?

अबला नहीं

नारी हूँ मैं।


जननी हूँ मैं

न जाने कितने युगों से पीड़ित हूँ मैं

फिर भी जीवित हूँ मैं

क्योंकि जीवन का आधार हूँ मैं?

अबला नहीं

नारी हूँ मैं।

      -@अरुणेश✍️



शनिवार, 2 मई 2020

प्रेम


रविवार, 17 नवंबर 2019

मां भारती की संतान


 हिन्दू हो या
मुसलमान
मां भारती की
संतान
अनेकता में
 एकता का हो
सम्मान
दिल में हो
प्यार
चेहरे पर हो
मुस्कान
ऐसा हो
हिंदुस्तान।
      ✍️अरुणेश कुमार गोलू

गुरुवार, 2 मई 2019

मेरी कविता

मेरी खुशियां भी तुम हो
मेरी मुस्कुराहट भी तुम हो
मेरी चाहत भी तुम हो
मेरी यादें भी तुम हो
मेरी दुल्हन भी तुम हो
मेरी दोस्त भी तुम हो
मेरी कविता भी तुम हो
मेरी अस्मिता भी तुम हो
मेरी जिन्दगी भी तुम हो
मेरी बंदगी भी तुम हो
मेरी तन्हाई भी तुम हो
मेरी परछाई भी तुम हो

- अरुणेश कुमार गोलू

तुम्हारी याद बहुत आयेगी

तुम्हारी याद
बहुत आएगी
जब तुम चली जाओगी
आज भी आती हो
कल भी आती थी
कल भी आएगी
जब तुम चली जाओगी
ओ पल भी था
ये पल भी है
ओ पल भी आएगा
याद तुम्हें आयेंगे
जब तुम चली जाओगी
ओ दिसंबर का महीना
ओ सावन का महीना
जो वक्त बिताया करती थी
ओ बारिश का मौसम
ओ सावन की बूंदें
तुम्हारी याद
बहुत आएगी
जब तुम चली जाओगी
तुम भी दीवानी थी
मैं भी दीवाना था
उस वक्त भी रहूंगा
जब तुम चली जाओगी
तुम्हारी याद बहुत आएगी
जब तुम चली जाओगी
ओ साइकिल की घंटी
जब तुम बजाया करती थी
ओ खत जो तुम लिखा करती थी
ओ वक्त जो तुम संजोया करती थी
पल-पल याद आएगी
जब तुम चली जाओगी
ओ गीत
जो कभी गाया करती थी
ओ कविता
जो कभी सुनाया करती थी
ये यादें बस यादें रह जाएंगे
जब तुम चली जाओगी
तुम्हारी याद बहुत आएगी
जब तुम चली जायेगी।

- अरूणेश कुमार गोलू

मिट्टी

न जानें
कैसी है
ये मिट्टी।
धूप में तपती
आंधी में उड़ती
रात में गिरती
बारिश में पिघलती।
न जानें
कैसी है
ये मिट्टी।
फसल उगती मिट्टी में
कटाई भी मिट्टी में
फिर भी उर्वरता
होती मिट्टी में।
न जानें
कैसी है
ये मिट्टी।
मूर्ति भी मिट्टी में
खिलौने भी मिट्टी में
घर भी मिट्टी में।
न जानें
कैसी है
ये मिट्टी।
जीवन का आधार मिट्टी में
मिलेगा हर कोई मिट्टी में
फिर भी मिट्टी
मिट्टी ही रहती।
न जानें
कैसी है
ये मिट्टी।

- अरूणेश कुमार गोलू

बुधवार, 27 मार्च 2019

हमारी हिंदी

आपनी भाषा
मेरी भाषा
जन-जन की भाषा
हिंदी हमारी।
मीठी बोली
प्यारी बोली
जन-जन की बोली
हिंदी हमारी।
देश की भाषा
प्रदेश की भाषा
जन-जन की भाषा
हिंदी हमारी।
देश की बोली
प्रदेश की बोली
जन-जन की बोली
हिंदी हमारी।
सिंधु-से-हिन्दू
हिन्दू-से-हिंदी
भाषा बनी
हिंदी हमारी।
शब्द-से-शब्दावली
देव-से-देवनागरी
लिपि बनी
हिंदी हमारी।
भारत की पहली
न्यूजीलैंड की चौथी
बोली बनी
हिंदी हमारी।
अपनी भाषा
मेरी भाषा
जन-जन की भाषा
हिंदी हमारी।

- अरुणेश कुमार गोलू