बिहार की राजनीति और नीतीश कुमार: क्या अब समय है सम्मानजनक सेवानिवृत्ति का?
बिहार की राजनीति में बीते दो दशकों से एक ही चेहरा सत्ता के केंद्र में बना हुआ है—नीतीश कुमार। बार-बार पाला बदलकर मुख्यमंत्री बने रहने वाले नीतीश कुमार का हालिया अस्वस्थ्य रूप सार्वजनिक मंचों पर स्पष्ट दिखने लगा है। हाल ही में राष्ट्रगान के दौरान उनका असामान्य व्यवहार कई सवाल खड़े करता है। क्या यह महज एक संयोग था, या उनके गिरते स्वास्थ्य का संकेत?
नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा को देखें तो उन्होंने बिहार को कई बड़े फैसले दिए, लेकिन क्या अब उनकी कार्यक्षमता पहले जैसी बनी हुई है? एक मुख्यमंत्री का पद केवल राजनीतिक अस्तित्व बनाए रखने का माध्यम नहीं हो सकता, बल्कि यह एक जिम्मेदारी भी है—जिसके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह सक्षम होना जरूरी है।
क्या अब बिहार को नए नेतृत्व की जरूरत है?
यदि कोई ड्राइवर उम्रदराज़ हो जाए और उसकी सेहत ऐसी न रहे कि वह सुरक्षित रूप से गाड़ी चला सके, तो क्या उसे जबरदस्ती गाड़ी चलाने के लिए कहा जाएगा, या फिर उसे सम्मानजनक सेवानिवृत्ति देकर आराम करने दिया जाएगा? यही सवाल बिहार की राजनीति पर भी लागू होता है। क्या बिहार की जनता को अब एक नए, ऊर्जावान और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सोचने वाले नेतृत्व की आवश्यकता नहीं है?
बिहार देश का एक महत्वपूर्ण राज्य है, जिसे नई ऊर्जा, नए विजन और तेज़ निर्णय लेने की क्षमता वाले नेतृत्व की जरूरत है। यदि कोई नेता अपनी शारीरिक स्थिति के कारण प्रभावी तरीके से शासन नहीं कर सकता, तो उसका पद पर बने रहना न केवल उसके लिए अन्यायपूर्ण है, बल्कि पूरे राज्य के लिए भी हानिकारक हो सकता है।
नीतीश कुमार का योगदान और आगे की राह
नीतीश कुमार ने बिहार में कई बड़े बदलाव किए, लेकिन यह भी देखना होगा कि उन्होंने बिहार को क्या दिया और बिहार से क्या लिया। उनका शासनकाल कई महत्वपूर्ण फैसलों के लिए जाना जाएगा, लेकिन अब समय आ गया है कि उनके काम का निष्पक्ष और तथ्यपरक मूल्यांकन हो। राजनीति में किसी भी व्यक्ति का योगदान महत्वपूर्ण होता है, लेकिन सत्ता में बने रहने की जिद अगर राज्य की प्रगति में बाधा बनने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
इसलिए, बिहार के हित में और स्वयं नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, अब उन्हें एक सम्मानजनक सेवानिवृत्ति देकर नई पीढ़ी को आगे आने का मौका देना चाहिए। उनके लिए शुभकामनाएं कि वे एक मार्गदर्शक की भूमिका में बिहार की राजनीति को नई दिशा दें, लेकिन अब बिहार को एक नए नेतृत्व की जरूरत है, जो इस राज्य को नए ऊंचाइयों तक ले जाए।
बिहार कोई प्रयोगशाला नहीं है, जहां सत्ता किसी व्यक्ति विशेष की महत्वाकांक्षा के लिए कुर्बान की जाए। यह समय है नए बिहार, नए नेतृत्व और नए भविष्य की ओर बढ़ने का।
अरुणेश कुमार
