गुरुवार, 2 मई 2019

मिट्टी

न जानें
कैसी है
ये मिट्टी।
धूप में तपती
आंधी में उड़ती
रात में गिरती
बारिश में पिघलती।
न जानें
कैसी है
ये मिट्टी।
फसल उगती मिट्टी में
कटाई भी मिट्टी में
फिर भी उर्वरता
होती मिट्टी में।
न जानें
कैसी है
ये मिट्टी।
मूर्ति भी मिट्टी में
खिलौने भी मिट्टी में
घर भी मिट्टी में।
न जानें
कैसी है
ये मिट्टी।
जीवन का आधार मिट्टी में
मिलेगा हर कोई मिट्टी में
फिर भी मिट्टी
मिट्टी ही रहती।
न जानें
कैसी है
ये मिट्टी।

- अरूणेश कुमार गोलू

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