रविवार, 10 जनवरी 2021

नारी हूँ मैं

 अबला नहीं

नारी हूँ मैं,

दुर्गा का स्वरूप हूँ मैं

ममता की छांव हूँ मैं

मां-बाप की शान हूँ मैं

बेटी हूँ मैं

पापा की प्यारी हूँ मैं

माता की दुलारी हूँ मैं

अबला नहीं

नारी हूँ मैं।


फिर क्यों जन्म से पहले

मार दी जाती हूं मैं?

मां, बहन, बेटी और पत्नी भी हूँ मैं

फिर क्यों संसार में

बलात्कारियों के सर चढ़ी जाती हूँ मैं?

अबला नहीं

नारी हूँ मैं।


जननी हूँ मैं

न जाने कितने युगों से पीड़ित हूँ मैं

फिर भी जीवित हूँ मैं

क्योंकि जीवन का आधार हूँ मैं?

अबला नहीं

नारी हूँ मैं।

      -@अरुणेश✍️



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