शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे अश्विन माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इसे रास पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। शरद पूर्णिमा को विशेष इसलिए माना जाता है क्योंकि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और अपनी किरणों से धरती पर अमृत बरसाता है।
इस दिन से जुड़ी एक खास परंपरा है कि लोग रात में खुले आसमान के नीचे खीर रखते हैं, ऐसा माना जाता है कि चंद्रमा की किरणें इस खीर पर पड़ती हैं, जिससे उसमें औषधीय गुण आ जाते हैं। अगले दिन यह खीर प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती है।
शरद पूर्णिमा के साथ कई धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हैं, जैसे इस दिन भगवान कृष्ण ने गोपियों के साथ रासलीला की थी। वहीं, इसे माता लक्ष्मी की आराधना के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है, खासतौर पर "कोजागरी व्रत" रखने वालों के लिए, जो रात भर जागकर मां लक्ष्मी से धन और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।