हमें लगता है भारतीय नेताओं जैसी घोषणा दुनिया के किसी देश के नेता नहीं करते होंगे।घोषणा करके लोगों का ध्यान भटकाना कोई भारतीय नेताओं से सीखें।इस समय, जब देश को सबसे ज्यादा जरूरत अस्पतालों में ऑक्सीजन, बेड, दवाई ,डॉक्टर्स एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की है, तब हमारे देश के नेतागण इस पर ठोस बात न करके एक मई से अठारह (18) वर्ष के ऊपर सभी लोगों को टीका लगाने की घोषणा कर रहें। भला यह कैसे होगा? इसका अभी तक कोई खाका तैयार नहीं किया गया। अमेरिका जैसे देश की आबादी हमारे देश की चौथाई भर है इसके बावजूद भी वहां टीके बनाने वाले कई कम्पनियां हैं।उसने अब जाकर सभी युवाओं को टीका देने की शुरुआत की है।मगर अपने यहां तो सिर्फ दो ही कम्पनियां है,जो सीमित मात्रा में टीके का उत्पादन कर रही है।हालांकि कुछ टीके का आयात करने का फैसला भी किया गया है लेकिन यह कब तक सम्भव होगा, पता नहीं।ऐसे में यह सवाल बड़ा गंभीर है कि जब हम 45 साल के ऊपर वाले सभी लोगों को टीका नहीं दे पा रहे हैं, तो लगभग 70 करोड़ नई आबादी केलिए कहां से टीका आएगा? ऐसे तो पूरे देश में अफरा-तफरी मच जायेगी।
शुक्रवार, 23 अप्रैल 2021
ऐसे में जनता क्या करें?
दूसरी स्थिति यह है कि जिन वरिष्ठ नागरिकों के टीके की दूसरी खुराक नहीं मिल पा रही है,जिनके टीकाकरण का वक्त आगया है।समस्या यह हो चुकी है कि अस्पतालों में न टीके उपलब्ध हैं न इसकी आस-पास कोई व्यवस्था हो पा रही है।हालात तो ऐसे हो गए हैं कि बुजुर्ग लोग अस्पताल जा रहे हैं लेकिन टीका उपलब्ध न होने के कारण लौटकर आ जा रहे हैं। ऐसे में बुजुर्ग क्या करें? कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए हर अस्पताल के चक्कर भी नहीं लगाए जा सकते हैं।यानी कोरोना के मरीज लगातार बढ़ रहें हैं।लेकिन सरकार टीकाकरण अभियान का उचित प्रबंधन नहीं कर पा रही है।जहां भी कमियां सामने आ रही है,वहां हमारी सरकार को पूरी मुस्तैदी से काम करना चाहिए।लेकिन आलम यह है कि आज देश में कोरोना से कम लेकिन सरकार की व्यवस्था के कारण ज्यादा लोग मर रहें।
अरुणेश कुमार,
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अरुणेश कुमार पेशे से पत्रकार हैं। महात्मा गांधी के सत्याग्रह आन्दोलन की जन्मस्थली चम्पारण, बिहार के एक छोटे से गाँव सिसवा पटना से ताल्लुक रखते हैं। राजनीति, खेल, संगीत और साहित्य में गहरी रुचि रखने वाले अरुणेश विभिन्न वेबसाइट्स, यूट्यूब चैनल के लिए लगातार लिखते रहे हैं।
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