कोरोना और चपेट में दुनिया की अर्थव्यवस्था
इस समय कोरोना से पूरी दुनिया में तबाही मची हुई है।तकरीबन ढ़ेड़ लाख लोगों की जाने जा चुकी है और ये आंकड़े लगातार बढ़ती जा रही है।लगभग 20 लाख से ज्यादा लोग इसके चपेट में आ चुके हैं।ये खतरा तो है लेकिन एक दूसरा खतरा पूरी दुनिया के सामने तबाही मचाने वाली है।जिसमें पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चौपट होती दिख रही है।ध्यान देने की बात यह है कि अगर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चौपट हो जायेगी।तो कितने लोग भूखमरी के चपेट में आएंगे,कितने लोग बेरोजगार होंगे,कितने उद्योग-धंधे ठप हो जायेगी।कितने लोग बर्बाद होंगे और दुनिया के कितने देश दिवालिया हो जायेगी।हम सिर्फ इसका अंदाजा लगा सकते हैं।
इस समय अगर पूरी दुनिया की बात करें तो अगर किसी देश की अर्थव्यवस्था 1% बढ़ती है तब दुनिया के अर्थशास्त्रियों मानना है कि अर्थव्यवस्था की स्थिति अच्छी नहीं है।यहाँ तक 3% भी होती है तब भी बहुत ख़राब मानी जाती है।खासकर अगर विकसित देश हो तो उसके लिए ये स्थिति काफी निराशाजनक होती है।
अगर हम भारत की बात करें तो पिछले दिनों कहा जा रहा था कि भारत की अर्थव्यवस्था 8% से ज्यादा जा सकती है।लेकिन 7% से 5% होगई।धीरे-धीरे यह 4.5% हो गई।लेकिन अब कुछ अर्थशास्त्रियों के विचार पर हम गौर करें तो कोरोना के वजह से भारत की अर्थव्यवस्था 1.6% पर आकर रुक सकती है।कुछ अर्थशास्त्री के विचार से तो इससे भी भयावह स्तिथि हो सकती है।हालांकि सरकार इन आंकड़ों को नकार रही है।
अगर हम अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की बात करें तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में तकरीबन 3-4% की कमी आ सकती है।अगर हम दुनिया के बड़े देशों की चर्चा करें, खासकर अमेरिका और यूरोप।
अमेरिका के बारे में बताया जा रहा है कि इसकी अर्थव्यवस्था में 5.9% की गिरावट आ सकती है।यूरोप के बारे में कहा जा रहा है कि औसतन 7.5% की गिरावट आ सकती है।इटली जहाँ पर कोरोना का हालत सबसे खराब है वहाँ पर 9.1% की गिरावट होने की अंदाजा लगाया जा रहा है।अगर यही आंकड़ा बिल्कुल सही रहा तो इसमें से कितने देश दिवालिया होंगे,कितने लोग बेरोजगार होंगे,कितने लोग भुखमरी से मरेंगे इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
अगर हम चीन की बात करें तो इसकी अर्थव्यवस्था 1.2% पर आकर रुक सकती है।चीन में पिछले 30 सालों से कभी भी 7-8% से कम नहीं हुई थी।चीन के पिछले तिमाही के आंकड़ो में 6.8% की गिरावट आई थी।1992 में चीन ने अपना जीडीपी ग्रोथ पूरी दुनिया के सामने रखा था।उसके बाद से यह पहला आंकड़ा है जो गिरती हुई दिखाई पड़ रही है।
चीन वही देश है जो सबसे पहले कोरोना की चपेट में आया था।यहां दो महीने तक लॉकडाउन था जिसे अब जाकर हटाया गया है।सिर्फ दो महीनों में 6.8% की गिरावट आई है।
अमेरिका की ऐसी स्तिथि है कि वहाँ कुछ राज्यों के अंदर लोग सड़को पर उतर गए हैं।सरकार का विरोध कर रहे हैं लॉक डाउन हटाने केलिए।ताकि अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके।कारखाने चलाने की मांग की जा रही है।जानकारी के मुताबिक अमेरिका में पिछले एक महीने में 2 करोड़ 20 लाख लोगों की नौकरी जा चुकी है।
अगर हम यह कहें कि कोरोना पर विजय प्राप्त कर लेंगे तो हमारी अर्थव्यवस्था ठीक हो जायेगी।लेकिन कोरोना पर विजय तब ही प्राप्त हो सकती है जब तक इसकी कोई दवाई आ जायेगी और ये कहना तो बिल्कुल गलत है कि लॉक डाउन ही एक मात्र इलाज है।हाँ इसके द्वारा थोड़ा कम किया जा सकता है परंतु खत्म नहीं।
अभी कुछ दिन पहले तक सिंगापुर के बारे में कहा जा रहा था कि कोरोना पर विजय प्राप्त कर ली है।वहाँ पर मरीजों की संख्या पूरी तरह से घट गई थी।पूरी दुनिया इसे चमत्कार के नज़रिए से देख रही थी।लेकिन अचानक पिछले सात दिनों में लगभग 6 हजार नए मरीज मिलने की खबरें आई है।
विशेषज्ञों के अनुसार अगर कोरोना दुबारा से अटैक करता है तो पहले से भी ज्यादा खरतनाक होता है।
जापान में भी यही कहा जा रहा था कि कोरोना कंट्रोल हो चुका है लेकिन पिछले 24 घण्टों में लगभग 600 नए मरीज मिलें हैं।
अगर हम सुधार की बात करें तो पूरी दुनिया इसके लिए इकोनॉमिक पैकेज दे रही है ताकि अर्थव्यवस्था को किसी भी तरह से बचाया जा सके।भारत ने भी तकरीबन 1 लाख 70 हजार करोड़ इकोनॉमिक पैकेज का एलान किया है।अमेरिका तकरीबन 2-2.5 ट्रिलियन डॉलर पैकेज देने का एलान किया है।ताकि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके।
अगर हम पूरी दुनिया की बात करें तो तकरीबन 8 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमिक पैकेज दिया गया है।लेकिन INF के अनुसार ये पैकेज भी बहुत कम है।
इस आंकड़े के अनुसार पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत पर भी भारी संकट आने वाली है।
*अरुणेश कुमार*

वाह
जवाब देंहटाएं