बुधवार, 15 अप्रैल 2020

महामारी के बीच बढ़ती अफवाहें

महामारी के बीच बढ़ती अफवाहें

जिस महामारी से पूरी दुनिया जूझ रही है जिसमें भारत भी है।पिछले कुछ महीनों में जिस स्थिति में संक्रमण का प्रभाव बढ़ रहा है उससे एक भयावह स्तिथि पैदा हो रही है।भारत ही नही  बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चुनौती है कोरोना के इस महामारी से लड़ना। 
चीन के वुहान शहर से निकली ये बीमारी  आज पूरी दुनिया इसकी चपेट में आ चुकी है।दुनिया के एक सौ नब्बे से अधिक देश इसकी चपेट में आ चुके हैं।अमेरिका जैसे सर्वशक्तिशाली देश भी घुटने टेक चुके हैं।
वैश्विक महामारी की दर्जा पा चुके इस विषाणु का ईलाज तक नहीं उपलब्ध है।भले ही मानव आज अंतरिक्ष मे पहुंच चुका हो अपने रहने केलिए जगह तलाश रहा हो।चांद से लेकर मंगल तक घूम रहा हो लेकिन एक इस बीमारी के सामने विवश नजर आ रहा है।
प्रति दिन हजारों लोगों की जाने जा रही है लेकिन हम देखने के अलावा हम कुछ कर नहीं पा रहे हैं।पूरी दुनिया हताश और निराश हो चुकी है।
दुनिया के डॉक्टरों की सलाह माने तो सिर्फ और सिर्फ सामाजिक दूरी के द्वारा इस महामारी को रोका जा सकता है।दूसरा कोई रास्ता नजर नहीं आरही है।मतलब सम्पूर्ण बंदी।
ख़राब अर्थव्यवस्था के बावजूद भारत में भी सम्पूर्ण बंदी को शख्ती ले लागू किया गया। 
जिस तरह से जिनती तेजी से कोरोना फैल रही है उससे कहीं अधिक तेजी से अफवाह।सरकार के तरफ से तमाम दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं उसके बावजूद भी अफवाहों का बाजार गरम होती जा रही है।यह जानते हुए भी की सामाजिक दूरी के अलावा कोई विकल्प नहीं है।फिर भी लोग अफवाहों का शिकार हो रहे हैं।जनता कर्फ्यू के बावजूद पिछले दिनों  अफवाहों के चलते दिल्ली के आनंद विहार स्टेशन पर हजारों की संख्या में एक जगह इकठ्ठा हुए जो कि सरार गलत था।सोशल मीडिया से लेकर मेन स्ट्रीम मीडिया में ये खबरें चलाई गई थी।भारत पाक विभाजन की तस्वीर से तुलना की जा रही थी।पिछले दिनों गुजरात के सूरत से भी गरीब मजदूरों की घटना सामने आई।कल एक बार फिर मुंबई से एक खबर आई एक साथ हजारों को संख्या में बांद्रा स्टेशन पर पहुँच गए।इसके कई पहलू दिखाई दे रहे हैं राजनीति भी हो रही है।पक्ष-विपक्ष में आरोप प्रत्योप भी खूब हो रही है।
अफवाहों की बात करें तो  सोशल मीडिया पर (फेसबुक, व्हाट्सएप) कई तरह से घरेलू नुख्से भी बताए जा रहे हैं। नमक,हल्दी से लेकर गाय के गोबर और गौमूत्र तक के नुख्से तक बताए जा रहे हैं।जिसकी पुष्टि चिकित्सा विशेषज्ञ नहीं करते हैं।
इन सबके बीच सुकून और राहत की खबरें आई चाहे वो तमाम सेलिब्रिटी के तरफ से हो या बिजनेस मैन के तरफ से
।सभी के द्वारा प्रधानमंत्री मंत्री राहत फंड में सहयोग किया।
या गरीब मजदूर वर्ग को खाना खिलाने की खबर हो या आर्थिक रूप से मदद करने की खबरें।जो मानवता की मिशाल है।मानवता तो हमारी संस्कृति में ही है।हम हमेसा से करते आ रहे हैं।आगे भी करेंगे।ऐसी हमारी संस्कृति है।
             *अरुणेश कुमार*✍

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