रविवार, 19 अप्रैल 2020

महामारी और बढ़ते मनमानी

*महामारी और बढ़ते मनमानी*
इस देश की अजीब विडंबना है।जब देश को कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए आपसी सहयोग की जरूरत है तब कुछ लोग नियमों की धज्जियां उड़ाते दिख रहें हैं,बल्कि प्रशासन और चिकित्सकों पर हमला करते देखे जा रहे हैं।जो लोगों को जागरूक करने केलिए तथा उनकी सेवा में दिन रात लगे हुए हैं, उन्हीं पर हमला करना कहाँ तक जायज़ है?मतलब साफ है कि आप अपने मौत का निमंत्रण दे रहें हैं।हाल की एक खबर सामने आई है पंजाब के पटियाला से जहां लोगों को नियमों का पालन करने केलिए पुलिस अधिकारी गए तो उनका हाथ काट लिया गया।एक घटना मुरादाबाद से आई जब एक व्यवसायी की मौत कोरोना संक्रमण से हुई तब पुलिस और चिकित्सकों का दल उन्हें समझाने केलिए गयी ताकि शव से दूरी बनाये रखें क्योंकि कोरोना का संक्रमण मृत शव से भी होती है।तब मुहल्ले वासी उन्हीं पर पत्थराव करने लगे।जिसमें सभी सदस्य घायल भी रहें।ऐसी हरकतों पर दंडनात्मक कार्रवाई भी हो रही है,पर लोग बाज नहीं आ रहे हैं।
आखिर ये क्योंकि नहीं समझ रहे हैं कि आपका आपके परिवार आपके समाज का जीवन सुरक्षित रहें इसलिए वो अपना जीवन दांव पर लगा कर आपके पास जा रहें हैं।ताकि आप कोरोना संदिग्ध लोगो से दूर रहें।मगर लोग ये बात समझने से बाज नहीं आ रहे हैं।यह समझना चाहिए कि आपके मुहल्ला और क़स्बा में एक व्यक्ति संक्रमण होता है तो पूरे समाज को संक्रमित कर सकता है।इसलिए ये ध्यान रखें कि संक्रमण मुक्त कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।इसमें आपकी सहयोग की जरूरत है,आपका धर्म ही नहीं कर्तव्य बनता है कि आप साथ दे।


अगर लोगों को लगता है कि उनके अधिकार का हनन हो रहा है तो ये गलत है।अधिकार होने का मतलब ये नहीं है कि आप संक्रमण को किसी दूसरे व्यक्ति में फैलाएं।आप प्रशासन का साथ न दें।लगातार मोबाईल से लेकर टीवी ,रेडियो तथा अखबार के माध्यम से जागरूक रहने केलिए संदेश दिए जा रहे हैं।फिर भी लोग गैरजिम्मेदाराना हरकत करने से बाज नहीं आ रहे हैं।प्रधानमंत्री के अपील के बावजूद भी घर से बाहर निकल रहें।अपनी जिम्मेदारी को ताख पर रख कर।
     ये ध्यान रखने की जरूरत है दुनिया के सभी देश आज संक्रमण के खिलाफ घुटने टेक चुकें हैं।जिसमें विकसित और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था वाला देश भी है।ऐसे में आप प्रशासन का साथ देने के बजाय उनके नियमों और कानून को ताख पर रखकर अपनी मनमानी कर रहें हैं।
  हाल की घटना दिल्ली से है जहाँ एक चिकित्सक की  मौत ठोकर लगने से हो गयी।जिनकी गाड़ी खराब हो गयी थी।फिर भी अपने बेटे के साईकिल लेकर हॉस्पिटल चले गए।अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अपनी जान गवां बैठे।
जिस देश मे एक डॉक्टर अपनी जान की परवाह किए वगैर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहें हैं उस देश में डॉक्टरों पर हमला किये जा रहे हैं, जो कि सर्वनाक है।
    *अरुणेश कुमार*✍

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